माघ शुक्ल दशमी पर बाबा रामदेव धाम में उमड़ा आस्था का महासागर, श्रीगंगानगर श्रद्धा और जयकारों से गुंजायमान

श्रीगंगानगर | माघ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर सुरतगढ़ मार्ग स्थित प्राचीन एवं सिद्धपीठ बाबा रामदेवजी महाराज मंदिर में श्रद्धा, भक्ति और लोक आस्था का विराट स्वरूप देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं की अखंड धारा बाबा के पावन धाम की ओर प्रवाहित होने लगी। “जय बाबा रामदेव” और “रामसा पीर की जय” के गगनभेदी उद्घोषों से समूचा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया।प्रातःकाल मंदिर के मुख्य पुजारी पं. ललित जोशी के आचार्यत्व में वैदिक विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना संपन्न करवाई गई। शंखनाद, घंटानाद और मंत्रोच्चार के मध्य बाबा रामदेवजी महाराज का अभिषेक, श्रृंगार एवं महाआरती हुई। ॐ नमो भगवते रामदेवाय के पावन मंत्रों ने श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति भाव का संचार कर दिया।

मंदिर परिसर में दर्शनार्थ पहुंचे श्रद्धालु नंगे पांव, ध्वज-पताकाएं धारण कर, भक्ति गीतों का गान करते हुए बाबा के चरणों में शीश नवाते दिखाई दिए। किसी ने संतान सुख की कामना की, किसी ने आरोग्य और संकट मुक्ति का वरदान मांगा, तो किसी ने मनोकामना पूर्ण होने पर बाबा का कृतज्ञतापूर्वक स्मरण किया। यह दृश्य लोक आस्था, विश्वास और सनातन परंपरा का जीवंत उदाहरण बन गया।श्रीगंगानगर नगर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण अंचलों और दूरस्थ क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पावन मेले में सम्मिलित हुए। वृद्ध, महिलाएं, युवा और बच्चे—सभी के मुख पर बाबा के दर्शन का संतोष और श्रद्धा की झलक स्पष्ट दिखाई दी। मंदिर के बाहर पूजन सामग्री, नारियल, धूप-दीप और प्रसाद की दुकानों पर विशेष चहल-पहल बनी रही।

श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रबंधन, पुलिस प्रशासन और सेवाभावी स्वयंसेवकों द्वारा व्यापक व्यवस्थाएं की गईं। मंदिर परिसर में बैरिकेडिंग कर श्रद्धालुओं को अनुशासित एवं सुचारू दर्शन करवाए गए। स्वयंसेवकों द्वारा सेवा भावना से व्यवस्थाओं को संभाला गया।मेले के दौरान निरंतर भजन-कीर्तन और बाबा रामदेवजी के जयघोषों से वातावरण भक्तिरस में डूबा रहा। चित्तलांगिया धर्मशाला में श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जहां दाल-रोटी का प्रसाद प्रेमपूर्वक परोसा गया। हजारों श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया।

इसके अतिरिक्त मंदिर परिसर के बाहर विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं द्वारा भी प्रसाद एवं जल सेवा की व्यवस्था की गई।धार्मिक मेले के मद्देनज़र यातायात व्यवस्था में अस्थायी परिवर्तन किए गए। सुरतगढ़ सर्किल से शिव चौक तक भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहा। नगर के भीतर आने-जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से संचालित किया गया। दोपहिया और चौपहिया वाहनों की पार्किंग रामलीला मैदान, सुरतगढ़ सर्किल एवं धानमंडी ग्राउंड में निर्धारित की गई, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।माघ शुक्ल दशमी पर आयोजित यह भव्य मेला एक बार फिर यह प्रमाणित करता है कि बाबा रामदेवजी महाराज जन-जन की आस्था, विश्वास और लोक श्रद्धा के केन्द्र हैं। उनका धाम केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और सनातन संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति है।

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